प्राइवेट स्कूलों की फीस पर दिल्ली सरकार की सख्ती, हर स्कूल में बनेगी SLFRC, अभिभावकों की सहमति के बिना नहीं बढ़ेगी फीस
दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों द्वारा बिना किसी उचित कारण के मनमानी तरीके से फीस बढ़ाने की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों पर अब सरकार ने सख्ती दिखाई है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने गुरुवार को घोषणा की है कि दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2024 के तहत अब
दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों द्वारा बिना किसी उचित कारण के मनमानी तरीके से फीस बढ़ाने की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों पर अब सरकार ने सख्ती दिखाई है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने गुरुवार को घोषणा की है कि दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2024 के तहत अब हर निजी स्कूल में School Level Fee Regulation Committee (SLFRC) का गठन अनिवार्य किया जाएगा।
यह समिति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 2028-29 तक के लिए फीस तय करेगी। किसी भी फीस बढ़ोतरी के प्रस्ताव से पहले अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी और लिखित सहमति लेना जरूरी होगा। स्कूलों को फीस बढ़ाने के लिए 18 तय पैमानों पर अपनी मजबूती साबित करनी होगी और यह साबित करना होगा कि बढ़ोतरी वाकई जरूरी है।
प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ोत्तरी को लेकर सरकार सख्त
दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों में फीस निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और अभिभावक हितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आशीष सूद ने स्पष्ट किया कि सभी निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को 15 जुलाई तक SLFRC गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस समय सीमा का पालन न करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा मंत्री ने कि “मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और अभिभावक हितैषी बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि “शिक्षा समाज के लिए एक पवित्र सेवा है, न कि कोई व्यावसायिक उद्यम। हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को किफायती और सुलभ बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
अभिभावकों के लिए राहत
इस व्यवस्था से अभिभावकों को फीस निर्धारण की पूरी प्रक्रिया में शामिल होने का अधिकार मिलेगा। इससे स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगेगा और फीस बढ़ोतरी पारदर्शी न्यायसंगत तरीके से होगी। अभिभावक संगठनों ने इस कदम का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे शिक्षा का खर्च आम मध्यम वर्गीय परिवारों की पहुंच में रहेगा। सरकार का यह कदम उन हजारों अभिभावकों के लिए राहत भरा है जो पिछले कई वर्षों से प्राइवेट स्कूलों द्वारा लगातार बढ़ाई जा रही फीस से परेशान हैं।