अंतरिक्ष में पाकिस्तान की खुफिया घेराबंदी: चीन की मदद से 16 महीने में छोड़े 6 सैटेलाइट, भारत पर रख रहा पैनी नजर
चीन की मदद से पाकिस्तान ने 16 महीनों में 6 अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लॉन्च कर भारत की घेराबंदी शुरू कर दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, AI और हाइपरस्पेक्ट्रल कैमरों से लैस यह नेटवर्क भारतीय क्षेत्र की रणनीतिक निगरानी कर रहा है।
New Delhi: भारत से सीधे मुकाबले में पिछड़ने के बाद पाकिस्तान अब अंतरिक्ष के रास्ते रणनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश में है। सुरक्षा और अंतरिक्ष विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान ने चीन की मदद से अपनी अंतरिक्ष निगरानी क्षमताओं का बेहद खामोशी और तेजी से विस्तार किया है।
पिछले महज 16 महीनों के भीतर पाकिस्तान ने 6 एडवांस्ड अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (पृथ्वी की निगरानी करने वाले उपग्रह) अंतरिक्ष में स्थापित किए हैं। यह एक ऐसा सैटेलाइट नेटवर्क है जो भारतीय क्षेत्र और रणनीतिक ठिकानों की नियमित व पैनी निगरानी करने में पूरी तरह सक्षम है।
दशकों की सुस्ती के बाद अंतरिक्ष कार्यक्रम में अचानक आई तेजी
पाकिस्तान के अंतरिक्ष कार्यक्रम का इतिहास बेहद सुस्त रहा है। साल 1961 में ‘स्पेस एंड अपर एटमॉस्फियर रिसर्च कमीशन’ (SUPARCO) की स्थापना के बाद से कई दशकों तक पाकिस्तान ने इक्का-दुक्का उपग्रह ही लॉन्च किए थे। लेकिन जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 के बीच अचानक आई तेजी ने रणनीतिक विशेषज्ञों को चौंका दिया है।
इन 16 महीनों में पाकिस्तान ने ऑप्टिकल इमेजिंग, हाइपरस्पेक्ट्रल और रिमोट-सेंसिंग क्षमताओं से लैस 6 नए सैटेलाइट तैनात कर दिए हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि इन उपग्रहों का प्रक्षेपण हालिया पहलगाम हमले और भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पहले ही शुरू हो चुका था, जो इसकी सोची-समझी क्रोनोलॉजी को दर्शाता है।
आम नागरिक सिस्टम नहीं, विशुद्ध सैन्य नेटवर्क: पूर्व रियर एडमिरल
हाल ही में पाकिस्तान के इस सैटेलाइट ग्रुप का विश्लेषण करते हुए भारतीय नौसेना के पूर्व फ्लैग ऑफिसर रियर एडमिरल सुधीर पिल्लई ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने अपने एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा कि 16 महीनों के इस दौर में पाकिस्तान ने जो नेटवर्क तैयार किया है, वह कोई आम नागरिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सिस्टम नहीं है, जिसका इस्तेमाल कभी-कभार मिलिट्री के लिए किया जाए।
बल्कि इसका ऑर्बिटल आर्किटेक्चर (कक्षा का ढांचा), इसमें लगे सेंसर्स और इसका बैकग्राउंड साफ बयां करते हैं कि इसे खास तौर पर रणनीतिक और सैन्य निगरानी के मकसद से ही तैयार किया गया है।
छिपी चीजों को ढूंढने और AI से डेटा प्रोसेस करने में सक्षम
पाकिस्तान का यह नया सैटेलाइट ग्रुप अत्यधिक आधुनिक और घातक है। इसमें शामिल उपग्रह हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें लेने और जमीन पर होने वाले मामूली बदलावों को भी पकड़ने में सक्षम हैं। उदाहरण के लिए, अक्टूबर 2025 में लॉन्च किया गया हाइपरस्पेक्ट्रल सैटेलाइट ‘HS-1’ अलग-अलग सामग्रियों (मटीरियल्स) में फर्क कर सकता है।
यह उन छिपी हुई सैन्य संपत्तियों या निर्माणों को भी ढूंढ सकता है जो आम ऑप्टिकल कैमरों की नजर से बच जाते हैं। इसके अलावा, हालिया लॉन्च किए गए PRSC-EO2 और PRSC-EO3 सैटेलाइट्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से डेटा को तुरंत प्रोसेस करने की क्षमता है, जिससे लाइव खुफिया जानकारी मिलती है।
बैकस्टेज में चीन: लॉन्चिंग से लेकर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर तक मदद
पाकिस्तान की इस अचानक अंतरिक्ष छलांग के पीछे पूरी तरह से चीन का हाथ है। ये सभी सैटेलाइट या तो चीनी रॉकेटों के जरिए अंतरिक्ष में भेजे गए हैं या फिर इन्हें चीनी और पाकिस्तानी संस्थानों ने मिलकर विकसित किया है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बीजिंग और इस्लामाबाद की यह साझेदारी सिर्फ उपग्रह छोड़ने तक सीमित नहीं है; इसमें एडवांस्ड सैटेलाइट डिजाइन, संवेदनशील स्पेस टेक्नोलॉजी का ट्रांसफर और रियल-टाइम डेटा-शेयरिंग के गहरे समझौते शामिल हैं, जो सीधे तौर पर भारत की सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती पेश करते हैं।