ममता बनर्जी को एक और झटका, कोयल मल्लिक का राज्यसभा से इस्तीफा, TMC में नेताओं के पलायन का दौर जारी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस अब तक के सबसे बड़े राजनीतिक संकट से घिरी है। पार्टी में इस्तीफों की झड़ी लगी है, जिससे सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। एक के बाद एक विधायक, सांसद और प्रमुख नेता टीएमसी का साथ छोड़ रहे हैं, और

Jun 11, 2026 - 20:30
ममता बनर्जी को एक और झटका, कोयल मल्लिक का राज्यसभा से इस्तीफा, TMC में नेताओं के पलायन का दौर जारी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस अब तक के सबसे बड़े राजनीतिक संकट से घिरी है। पार्टी में इस्तीफों की झड़ी लगी है, जिससे सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। एक के बाद एक विधायक, सांसद और प्रमुख नेता टीएमसी का साथ छोड़ रहे हैं, और इस सूची में अब जानी-मानी बंगाली अभिनेत्री कोयल मल्लिक का नाम भी शामिल हो गया है। उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है, जिससे ममता बनर्जी के सामने एक और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

कोयल मल्लिक 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में ही तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर संसद पहुंची थीं। उनका यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब पार्टी पहले से ही कई आंतरिक कलह और नेताओं के पलायन से जूझ रही है। कोयल मल्लिक राज्यसभा से इस्तीफा देने वाली चौथी सांसद हैं। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उन्होंने सिर्फ संसद सदस्यता छोड़ी है या पार्टी से भी किनारा कर लिया है।

इससे पहले, तृणमूल कांग्रेस के तीन अन्य राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक भी इस्तीफा दे चुके हैं। सुखेंदु शेखर ने 8 जून को अपनी राज्यसभा सदस्यता और पार्टी दोनों से इस्तीफा दिया था, वहीं सुष्मिता देव ने 10 जून को पद छोड़ा था। इन इस्तीफों ने पार्टी में जारी उथल-पुथल को और गहरा कर दिया है।

कौन हैं कोयल मल्लिक?

बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में कोयल मल्लिक एक जाना-पहचाना नाम हैं। उनका असली नाम रुक्मिणी मल्लिक है। वे दिग्गज बंगाली अभिनेता रंजीत मल्लिक की इकलौती संतान हैं। कोयल ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 2003 में ‘नाटेर गुरु’ नामक फिल्म से की थी, जिसमें उनके साथ जीत (जीतेंद्र मदनानी) मुख्य भूमिका में थे। उन्होंने अपने लंबे समय के बॉयफ्रेंड निश्पाल सिंह से शादी की है, और उनके दो बच्चे हैं – एक बेटा कबीर और एक बेटी काव्या।

युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता को देखते हुए, ममता बनर्जी ने उन्हें राज्यसभा भेजने के लिए मनाया था। 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में ही वे TMC के टिकट पर संसद पहुंची थीं। उन्हें अप्रैल 2026 में राज्यसभा की सदस्यता दिलाई गई थी। संसद सदस्य बनने के बाद कोयल मल्लिक ने ममता बनर्जी के प्रति अपना गहरा लगाव भी जाहिर किया था, लेकिन अब उन्होंने अपनी सांसदी छोड़ दी है, जिससे पार्टी को एक और झटका लगा है।

राज्यसभा में टीएमसी के सदस्यों की संख्या घटी

इस भगदड़ का सीधा असर संसद में तृणमूल कांग्रेस की ताकत पर पड़ा है। लोकसभा में टीएमसी के पास कुल 28 सांसद थे, जिनमें से 20 अलग हो चुके हैं। ऐसे में लोकसभा में अब टीएमसी के केवल 8 सांसद बचे हैं। वहीं, राज्यसभा में टीएमसी के सदस्यों की संख्या 13 थी, जिनमें से कोयल मल्लिक के इस्तीफे के बाद 4 सदस्य पद छोड़ चुके हैं। इस प्रकार, राज्यसभा में अब टीएमसी के पास सिर्फ 9 सदस्य रह गए हैं। कुल मिलाकर, ममता बनर्जी के साथ अब संसद में केवल 17 सांसद ही बचे हैं।

पार्टी में सांसदों और विधायकों के अलग होने का सिलसिला जारी

तृणमूल कांग्रेस से सांसदों और विधायकों के अलग होने का सिलसिला लगातार जारी है। लोकसभा से भी 20 सांसद अलग हो चुके हैं, हालांकि उनकी पूरी सूची अभी सामने नहीं आई है। विधानसभा की बात करें तो, कुल 80 टीएमसी विधायकों में से 58 विधायकों ने एक अलग गुट बना लिया है। इन बागी विधायकों ने ऋतुब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना है। इन विधायकों की सूची भी अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है, जिससे पार्टी के भीतर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

कल्याण बनर्जी की नाराजगी भी आई सामने

इस बीच, ममता बनर्जी के सबसे करीबी सांसदों में से एक कल्याण बनर्जी की नाराजगी भी सामने आई है। कल्याण बनर्जी की नाराजगी की मुख्य वजह टीएमसी का फर्जी साइन केस बताया जा रहा है। कल्याण बनर्जी ने साफ शब्दों में कहा है कि, “ममता दीदी को यह तय करना होगा कि वे मेरे साथ हैं या अभिषेक बनर्जी के साथ। अभिषेक को सीनियर नेताओं का सम्मान करना नहीं आता, वे बहुत अहंकारी हैं। इसी वजह से पार्टी बर्बाद हुई है।” उनके इस बयान ने पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी के बढ़ते कद और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी को उजागर किया है।

कुल मिलाकर, तृणमूल कांग्रेस में जारी यह भगदड़ और आंतरिक कलह ममता बनर्जी के लिए एक गंभीर राजनीतिक चुनौती बनकर उभरी है। पार्टी का भविष्य फिलहाल असमंजस के घेरे में है, और आने वाले समय में इसके और भी बड़े राजनीतिक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।