दिल्ली में लागू हुई नई EV पॉलिसी-2026, इलेक्ट्रिक वाहनों पर मिलेगा फायदा, प्रदूषण कम करने के लिए सरकार का बड़ा कदम
दिल्ली सरकार ने राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए अपनी महत्वाकांक्षी नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2026 को लागू कर दिया है। इस संबंध में दिल्ली सरकार द्वारा राजपत्र अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिससे यह नीति आज से ही प्रभावी हो गई है और मार्च 2030 तक लागू रहेगी।
दिल्ली सरकार ने राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए अपनी महत्वाकांक्षी नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2026 को लागू कर दिया है। इस संबंध में दिल्ली सरकार द्वारा राजपत्र अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिससे यह नीति आज से ही प्रभावी हो गई है और मार्च 2030 तक लागू रहेगी। यह नीति नागरिकों को विभिन्न प्रोत्साहनों, व्यापक कर छूट और सब्सिडी के माध्यम से लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का कुल लाभ प्रदान करने का लक्ष्य रखती है। इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को प्रोत्साहित करने, पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग के लिए प्रोत्साहन देने, रोड टैक्स में छूट तथा पंजीकरण शुल्क में कमी जैसे अनेक नए प्रविधान इस नीति का हिस्सा हैं। एक महत्वपूर्ण शर्त के तहत, इस नीति के अंतर्गत खरीदे गए इलेक्ट्रिक वाहनों को तीन वर्ष की अवधि तक दिल्ली राज्य के बाहर नहीं बेचा जा सकेगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पहल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राजधानी में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने बताया कि इस नीति का प्रमुख लक्ष्य अधिक से अधिक नागरिकों को पेट्रोल और डीजल से चलने वाले पारंपरिक वाहनों के स्थान पर इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए, सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर दी जाने वाली सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहन राशियों में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससे ये वाहन आमजन के लिए अधिक सुलभ और आकर्षक बन सकें।
नई EV नीति पर 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करेगी दिल्ली सरकार
आगामी चार वर्षों की अवधि के लिए तैयार की गई इस नीति को बढ़ावा देने हेतु दिल्ली सरकार 7,000 करोड़ रुपये से अधिक का विशाल व्यय करेगी। इस कुल राशि में से, इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले उपभोक्ताओं को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन किया गया है। इसी प्रकार, पुराने और पात्र वाहनों की स्क्रैपिंग को बढ़ावा देने हेतु 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि निर्धारित की गई है। राजधानी में एक सुदृढ़ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए भी 1,000 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण निवेश किया जाएगा। इन प्रत्यक्ष व्यय के अतिरिक्त, रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में दी जाने वाली छूट के कारण सरकार को 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की कर छूट का वहन करना पड़ेगा। सरकार का स्पष्ट मत है कि यह व्यापक वित्तीय निवेश इलेक्ट्रिक वाहनों को आम जनता के लिए अधिक किफायती बनाने और दिल्ली में स्वच्छ तथा टिकाऊ परिवहन प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
नीति की प्रमुख विशेषताओं में कई दूरगामी प्रविधान शामिल हैं। एक जनवरी 2027 से, दिल्ली में पंजीकृत होने वाले सभी नए तिपहिया वाहन और हल्के मालवाहक वाहन अनिवार्य रूप से इलेक्ट्रिक श्रेणी के होंगे। इसी क्रम में, एक अप्रैल 2028 से, नए दोपहिया वाहनों का पंजीकरण भी केवल इलेक्ट्रिक वाहन के रूप में ही किया जा सकेगा, जो जीवाश्म ईंधन वाहनों से संक्रमण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग सुविधा को सुगम बनाने हेतु, सरकार का लक्ष्य पूरे शहर में लगभग 30,000 चार्जिंग पॉइंट्स का एक सघन नेटवर्क विकसित करना है।
इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों पर 1 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि
इसके अतिरिक्त, घरों में इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज करने के इच्छुक उपभोक्ताओं के लिए अलग बिजली मीटर की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। नीति के तहत विभिन्न श्रेणियों के इलेक्ट्रिक वाहनों पर आकर्षक प्रोत्साहन राशि का भी प्रविधान किया गया है। इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने पर अधिकतम 30 हजार रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा, जबकि ई-ऑटो पर 50 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। एन-1 श्रेणी के इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों के लिए यह प्रोत्साहन राशि एक लाख रुपये तक निर्धारित की गई है। पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष इंसेंटिव दिए जाएंगे; पुरानी दोपहिया गाड़ी स्क्रैप कराने पर 10 हजार रुपये, ऑटो स्क्रैप कराने पर 25 हजार रुपये और कार स्क्रैप कराने पर एक लाख रुपये तक की राशि प्राप्त होगी। एन-1 श्रेणी के ट्रकों के लिए 50 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि का भी प्रविधान है। इसके अलावा, 30 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क पूरी तरह से माफ रहेगा, जिससे इन वाहनों की खरीद और भी सस्ती हो जाएगी।