इंदौर विकास प्राधिकरण की फर्जी NOC तैयार कर धोखाधड़ी करने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार, नक्शा पास कराने की थी कोशिश

इंदौर की तुकोगंज थाना पुलिस ने इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) के नाम पर फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र तैयार कर धोखाधड़ी करने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस जालसाजी के मामले में एक महिला सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) विभाग को गुमराह

Jul 11, 2026 - 16:30
इंदौर विकास प्राधिकरण की फर्जी NOC तैयार कर धोखाधड़ी करने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार, नक्शा पास कराने की थी कोशिश

इंदौर की तुकोगंज थाना पुलिस ने इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) के नाम पर फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र तैयार कर धोखाधड़ी करने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस जालसाजी के मामले में एक महिला सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) विभाग को गुमराह कर एक आवासीय योजना का नक्शा पास कराने के लिए यह जाली दस्तावेज तैयार किए थे। तुकोगंज पुलिस ने आईडीए के भू-अर्जन अधिकारी की शिकायत पर मामला दर्ज कर तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहाँ से उन्हें पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

​पुलिस के अनुसार इस गंभीर धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब इंदौर विकास प्राधिकरण के भू-अर्जन अधिकारी ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, आरोपियों ने आईडीए के सक्षम अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर और सील का उपयोग कर एक कूटरचित एनओसी तैयार कर ली। इसके बाद आरोपियों ने इस फर्जी दस्तावेज को नगर एवं ग्राम निवेश कार्यालय इंदौर में जमा कर नक्शा पास कराने का प्रयास किया, लेकिन वेरिफिकेशन के दौरान यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया।​

तीन जालसाज गिरफ्तार 

मामले की गंभीरता को देखते हुए तुकोगंज थाना प्रभारी जितेंद्र चौहान के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुखबिरों और तकनीकी इनपुट के आधार पर दबिश देकर तीन मुख्य आरोपियों सानिया शेख निवासी आजाद नगर, इंदौर, राजा सिंह निवासी शांतिदीप कॉलोनी, एलआईजी के पीछे, थाना एमआईजी और पंकज व्यास निवासी फ्लैट नंबर 102, अमृत पैलेस, निपानिया को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपी पुलिस रिमांड पर 

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रिमांड अवधि के दौरान आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस रैकेट में विभाग का कोई कर्मचारी शामिल है या नहीं, और इन्होंने पूर्व में भी इस तरह की किसी अन्य फर्जी कार्यप्रणाली को अंजाम दिया है या नहीं।