उज्जैन हत्याकांड पर जीतू पटवारी का सरकार पर हमला, कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल
उज्जैन के कान्हीपुरा इलाके में ढाबे पर करणी सेना से जुड़े दो गुटों के बीच हुए खूनी संघर्ष में दो लोगों की मौत के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश सरकार और कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने उज्जैन को प्रदेश के गृह मंत्री का गृह नगर बताते हुए कहा कि शहर
उज्जैन के कान्हीपुरा इलाके में ढाबे पर करणी सेना से जुड़े दो गुटों के बीच हुए खूनी संघर्ष में दो लोगों की मौत के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश सरकार और कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने उज्जैन को प्रदेश के गृह मंत्री का गृह नगर बताते हुए कहा कि शहर एक बार फिर कानून व्यवस्था को लेकर चर्चा में है।
कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया पोस्ट में उज्जैन की घटना का जिक्र करते हुए प्रदेश के गृह मंत्री पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि “मध्यप्रदेश के सबसे असफल गृहमंत्री का गृह नगर उज्जैन फिर चर्चा में है, वजह भी वही है कानून-अ’व्यवस्था।” उन्होंने सवाल उठाया कि दो गुटों के बीच विवाद में दो लोगों की हत्या हो गई, ढाबे पर करीब 15 लोगों ने तलवार और डंडों से हमला किया और गाड़ियों के शीशे तक तोड़ दिए, इसके बावजूद मुख्यमंत्री कार्रवाई क्यों नहीं करते?
ढाबे पर हथियारों से हमला
बुधवार देर रात कान्हीपुरा स्थित लक्की दरबार ढाबे पर दो गुटों के बीच विवाद के बाद मामला हिंसक हो गया। पुलिस के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच पहले पद को लेकर विवाद हुआ था। मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह मामला शांत करा दिया, लेकिन आरोप है कि इसके बाद एक पक्ष ने अपने साथियों को बुला लिया। कुछ देर बाद करीब 12 से 15 लोग हथियारों के साथ ढाबे पर पहुंचे और वहां मौजूद लोगों पर तलवार व डंडों से हमला कर दिया। इस दौरान ढाबे पर खड़ी गाड़ियों के शीशे भी तोड़े गए। हमले में नीमनवासा निवासी राहुल दरबार उर्फ विजय प्रताप (42) गंभीर रूप से घायल हुए, जिनकी निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं उनके साथी जितेंद्र पवार (35) का शव ढाबे से कुछ दूरी पर झाड़ियों में मिला।
कांग्रेस ने कानून व्यवस्था पर किए सवाल
कांग्रेस ने इस घटना को प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति से जोड़ते हुए बीजेपी सरकार पर हमला बोला है। जीतू पटवारी का कहना है कि उज्जैन जैसे शहर में हथियारों से लैस लोगों का खुले तौर पर हमला करना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने मुख्यमंत्री को घेरते हुए सवाल किया कि उनके पास गृहमंत्री का भी प्रभार है फिर वो कानून व्यवस्था सुधारने के लिए कारगर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं।