कूनो में दिखी दुर्लभ कैराकल बिल्ली, दशकों बाद वापसी से गदगद हुए CM मोहन यादव

मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। लंबे समय बाद यहां दुर्लभ जंगली बिल्ली कैराकल की मौजूदगी दर्ज की गई है। कैमरा ट्रैप सर्वे के दौरान कैराकल की तस्वीरें सामने आने के बाद वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों में खुशी

Jun 6, 2026 - 08:30
कूनो में दिखी दुर्लभ कैराकल बिल्ली, दशकों बाद वापसी से गदगद हुए CM मोहन यादव

मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। लंबे समय बाद यहां दुर्लभ जंगली बिल्ली कैराकल की मौजूदगी दर्ज की गई है। कैमरा ट्रैप सर्वे के दौरान कैराकल की तस्वीरें सामने आने के बाद वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों में खुशी का माहौल है। यह खोज केवल एक दुर्लभ प्रजाति की वापसी नहीं, बल्कि कूनो के बेहतर होते प्राकृतिक वातावरण का भी संकेत मानी जा रही है।

विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर सामने आई इस खबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी खास उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि कूनो में कैराकल का दिखाई देना इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित बनाने के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार किसी जंगल में दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी उस क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन को दर्शाती है।

प्रोजेक्ट चीता के बाद कूनो में मजबूत हो रहा वन्यजीव तंत्र

कूनो नेशनल पार्क पिछले कुछ वर्षों से लगातार चर्चा में रहा है। अफ्रीका से लाए गए चीतों को बसाने के लिए शुरू किए गए प्रोजेक्ट चीता ने इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। हालांकि इस परियोजना का मकसद केवल चीतों का पुनर्वास नहीं था, बल्कि पूरे जंगल के पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करना भी था।


वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी क्षेत्र में शिकार, घास के मैदान, पानी के स्रोत और प्राकृतिक आवास बेहतर होते हैं तो उसका लाभ कई अन्य प्रजातियों को भी मिलता है। कूनो में कैराकल की वापसी इसी बदलाव का संकेत मानी जा रही है। इससे यह भी साफ होता है कि जंगल का प्राकृतिक संतुलन धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में कूनो में वन्यजीव निगरानी, संरक्षण और आवास सुधार पर लगातार काम किया गया है, जिसका असर अब दिखाई देने लगा है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में चल रहे संरक्षण कार्यक्रमों ने वन्यजीवों के लिए बेहतर माहौल तैयार किया है। यही कारण है कि अब कूनो सिर्फ चीतों का घर नहीं, बल्कि कई दुर्लभ प्रजातियों के लिए भी सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है।

क्या है कैराकल और क्यों मानी जाती है बेहद दुर्लभ प्रजाति?

कैराकल एक जंगली बिल्ली है, जो अपने लंबे शरीर, तेज रफ्तार और कानों पर मौजूद काले बालों के गुच्छों के कारण आसानी से पहचानी जाती है। यह आमतौर पर सूखे घास के मैदानों, झाड़ीदार इलाकों और खुले जंगलों में रहती है। भारत में इसकी संख्या बेहद कम मानी जाती है और इसे दुर्लभ वन्यजीवों की सूची में रखा जाता है।

वन्यजीव शोधकर्ताओं के अनुसार पिछले कई दशकों में आवास कम होने, मानव गतिविधियों के बढ़ने और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव के कारण कैराकल की संख्या प्रभावित हुई है। ऐसे में कूनो में इसका दिखाई देना संरक्षण प्रयासों के लिए एक सकारात्मक खबर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जंगल में शीर्ष शिकारी और दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी वहां के स्वस्थ इकोसिस्टम का संकेत होती है। कूनो में कैराकल की तस्वीर सामने आने से यह उम्मीद बढ़ी है कि आने वाले वर्षों में यहां अन्य दुर्लभ वन्यजीव भी दिखाई दे सकते हैं।

कूनो नेशनल पार्क अब केवल प्रोजेक्ट चीता की वजह से ही नहीं, बल्कि जैव विविधता संरक्षण के एक सफल मॉडल के रूप में भी उभर रहा है। कैराकल की वापसी ने यह साबित कर दिया है कि सही संरक्षण नीति और बेहतर प्रबंधन से विलुप्ति के खतरे से जूझ रही प्रजातियों को सुरक्षित भविष्य दिया जा सकता है।

 

 

Anand Sahay पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और ब्रेकिंग न्यूज़ तथा राष्ट्रीय खबरों को कवर करने में विशेष रुचि रखते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण कर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।