केन-बेतवा लिंक परियोजना पर उमंग सिंघार का बड़ा हमला, मुआवजे में करोड़ों के घोटाले का लगाया आरोप, पढ़ें खबर
मध्यप्रदेश की प्रमुख 44 हजार करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी केन बेतवा लिंक परियोजना अब गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। परियोजना के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण के लिए दिए जा रहे मुआवजे में करोड़ों रुपये की कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के
मध्यप्रदेश की प्रमुख 44 हजार करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी केन बेतवा लिंक परियोजना अब गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। परियोजना के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण के लिए दिए जा रहे मुआवजे में करोड़ों रुपये की कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन अनियमितताओं का विस्तृत खुलासा करते हुए सत्तारूढ़ दल पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि केन बेतवा लिंक परियोजना में कार्यरत नागार्जुन कंपनी से चंदे के नाम पर 60 करोड़ रुपये बॉन्ड के रूप में प्राप्त हुए हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से इस कंपनी के साथ अपने संबंधों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने की मांग की। सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा यह सब कंपनी से चंदा प्राप्त करने के उद्देश्य से कर रही है। उनका यह भी कहना था कि प्रदेश भाजपा कार्यालय का निर्माण आदिवासियों की जमीन छीनकर मिलने वाले कमीशन से किया जा रहा है।
सिंघार ने बताया कि नागार्जुन कंपनी को परियोजना में हो रही देरी के कारण नुकसान हो रहा है, जिसके चलते डूब क्षेत्र के लोगों को डराया-धमकाया जा रहा है। उन्होंने आंदोलन कर रहे लोगों से मुलाकात के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने प्रश्न उठाया कि कंपनी का प्रोजेक्ट देरी होने पर उन्हें नुकसान हो रहा है, तो क्या यही कारण है कि लोगों को डराया जा रहा है?
ग्राम सभाओं में अनियमितताओं का आरोप
भू-अर्जन प्रक्रिया में ग्राम सभाओं की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, ग्राम सभाओं में व्यापक अनियमितताएं बरती गईं। उन्होंने बताया कि कई गांवों में तो ग्राम सभाएं ली ही नहीं गईं, और सरपंचों के फर्जी हस्ताक्षर करवाकर बिना उनकी सहमति के जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया। यह भू-अर्जन अधिनियम के स्पष्ट उल्लंघन का मामला है।
मुआवजा राशि में घोटाले का आरोप
मुआवजा राशि के वितरण में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। उमंग सिंघार ने बताया कि एक गांव में 8 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि उन लोगों को बांट दी गई, जो वास्तव में वहां रहते ही नहीं हैं। उन्होंने एक और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि एक आदिवासी बहुल गांव में, जहां एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहता है, वहां एक मुस्लिम परिवार को मुआवजा राशि कैसे दे दी गई, यह जांच का विषय है। उन्होंने इस पर भी सवाल उठाए कि मुआवजा राशि में करोड़ों रुपये की गड़बड़ी की गई है।
अब तक परियोजना के तहत 450 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा जा चुका है, और नेता प्रतिपक्ष ने आशंका व्यक्त की है कि आगे करीब 1 हजार करोड़ रुपये का मुआवजा बंटना शेष है, जिसमें भी इसी तरह की गड़बड़ियां होने की पूरी संभावना है।
आंदोलनकारियों को डराने और दबाव बनाने का आरोप
आंदोलनकारियों को डराने-धमकाने और उन पर दबाव बनाने के आरोप भी लगे हैं। सिंघार ने कहा कि आंदोलन करने वालों को गिरफ्तार कर छोड़ने के लिए पुलिस 20 से 30 हजार रुपये तक ले रही है। इसके अलावा, मुआवजे से वंचित करने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा जमीन के कागजात छीनने की घटनाएं भी सामने आई हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी जल्दबाजी में जमीन का अधिग्रहण क्यों किया जा रहा है, जबकि इसमें करोड़ों रुपये की गड़बड़ी साफ दिख रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने जोर देकर कहा कि केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं और इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। यह मामला न केवल वित्तीय गड़बड़ी का है, बल्कि आदिवासी अधिकारों के हनन और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अवहेलना का भी है।
11 करोड़ में से 8 करोड़ का फर्जी मुआवजा!
केन–बेतवा लिंक परियोजना में खरिहानी गांव को 11 करोड़ रुपये का मुआवजा आवंटित किया गया। आरोप है कि इसमें से करीब 8 करोड़ रुपये ऐसे लोगों को दिए गए, जिनका वास्तविक रूप से उस गांव से कोई संबंध नहीं है।
इतनी बड़ी कथित अनियमितता प्रशासन की नजर… pic.twitter.com/qSgn4JvPtb
— Umang Singhar (@UmangSinghar) July 17, 2026