MP शिक्षक भर्ती 2018: मेरिट में आगे, फिर भी नहीं मिला पसंद का स्कूल; हाईकोर्ट ने दिया दोबारा चॉइस फिलिंग का मौका

जबलपुर। मध्य प्रदेश की शिक्षक भर्ती 2018 में मेरिट में आगे होने के बावजूद पसंद का स्कूल चुनने का मौका नहीं मिलने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली। मामला उन शिक्षकों से जुड़ा है, जिन्हें मेरिट के आधार पर जनजातीय कार्य विभाग में नियुक्ति मिल गई थी, लेकिन इसके बाद स्कूल

Aug 24, 2026 - 09:30
MP शिक्षक भर्ती 2018: मेरिट में आगे, फिर भी नहीं मिला पसंद का स्कूल; हाईकोर्ट ने दिया दोबारा चॉइस फिलिंग का मौका

जबलपुर। मध्य प्रदेश की शिक्षक भर्ती 2018 में मेरिट में आगे होने के बावजूद पसंद का स्कूल चुनने का मौका नहीं मिलने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली। मामला उन शिक्षकों से जुड़ा है, जिन्हें मेरिट के आधार पर जनजातीय कार्य विभाग में नियुक्ति मिल गई थी, लेकिन इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग में खाली हुए पदों के लिए हुई चॉइस फिलिंग में शामिल नहीं किया गया। इससे मेरिट में पीछे रहे अभ्यर्थियों को स्कूल शिक्षा विभाग में पसंद के स्कूल मिल गए, जबकि अधिक अंक हासिल करने वाले कई अभ्यर्थी इस अवसर से वंचित रह गए।

सिवनी जिले में पदस्थ माध्यमिक शिक्षक साक्षी ताम्रकार सहित अन्य अभ्यर्थियों ने इसी व्यवस्था को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों में ऐसा बदलाव नहीं किया जा सकता, जिससे अभ्यर्थियों के अधिकार और चयन की मूल शर्तें प्रभावित हों।

कोर्ट ने राज्य सरकार को संबंधित मेरिटोरियस अभ्यर्थियों को दो महीने के भीतर स्कूल चॉइस फिलिंग पॉलिसी के तहत अपनी प्राथमिकताएं दर्ज करने का अवसर देने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद उनकी मेरिट के आधार पर पदस्थापना तय की जाएगी।

2022 के निर्देशों के बाद शुरू हुआ विवाद

दरअसल, 2018 की शिक्षक पात्रता परीक्षा के आधार पर स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के लिए संयुक्त शिक्षक भर्ती निकाली गई थी। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक आरक्षित वर्ग के कई अभ्यर्थियों ने सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों से भी अधिक अंक हासिल किए थे। मेरिट के आधार पर इनमें से कई अभ्यर्थियों को जनजातीय कार्य विभाग के स्कूल आवंटित हुए और उन्होंने वहां ज्वाइन कर लिया।

नवंबर-दिसंबर 2022 में जारी निर्देशों के बाद स्थिति बदल गई। एक विभाग में नियुक्ति ले चुके शिक्षकों को बाद में खाली हुए पदों के लिए होने वाली काउंसलिंग और चॉइस फिलिंग में शामिल नहीं किया गया। अभ्यर्थियों ने इसी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बाद में लागू की गई व्यवस्था के कारण उन्हें अपनी मेरिट का पूरा लाभ नहीं मिल सका।

नियुक्ति पत्र मिला तो चॉइस फिलिंग से कर दिया बाहर

सुनवाई के दौरान साक्षी ताम्रकार के मामले का भी विशेष उल्लेख हुआ। कोर्ट के सामने बताया गया कि उनका दस्तावेज सत्यापन हो चुका था और चॉइस लिस्ट में नाम भी शामिल था। इसके बावजूद उन्हें चॉइस फिलिंग का अवसर नहीं दिया गया, क्योंकि जनजातीय कार्य विभाग की ओर से उनका नियुक्ति पत्र जारी हो चुका था।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रशांत कुमार बड़ारया, अंशुमान सिंह और अमित कुमार चतुर्वेदी ने पक्ष रखा। अभ्यर्थियों का तर्क था कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद जारी निर्देशों के जरिए ऐसी शर्त लागू नहीं की जा सकती, जिससे पहले से निर्धारित चयन प्रक्रिया और मेरिट का लाभ प्रभावित हो।

दो महीने में देना होगा चॉइस फिलिंग का मौका

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को संबंधित आवेदकों को दो महीने के भीतर अपनी प्राथमिकताएं दर्ज करने का अवसर देने को कहा है। इसके बाद मेरिट के अनुसार उनकी पदस्थापना तय होगी।

इस प्रक्रिया के कारण यदि पहले से पदस्थ मेरिट में पीछे रहे शिक्षक प्रभावित होते हैं तो कोर्ट ने उनके लिए भी व्यवस्था दी है। ऐसे शिक्षकों का उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर संबंधित विभाग या दूसरे विभाग में समायोजन किया जाएगा।

हाईकोर्ट के फैसले से शिक्षक भर्ती 2018 से जुड़े संबंधित मेरिटोरियस अभ्यर्थियों के लिए स्कूल शिक्षा विभाग में चॉइस फिलिंग का रास्ता खुल गया है। साथ ही फैसले का असर मौजूदा पदस्थापनाओं पर भी पड़ सकता है।

Anand Sahay पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और ब्रेकिंग न्यूज़ तथा राष्ट्रीय खबरों को कवर करने में विशेष रुचि रखते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण कर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।