“पाक से दोस्ती पर भारत असहज न हो”, सिंगापुर में तुर्की के विदेश मंत्री का बड़ा बयान
सिंगापुर में आयोजित IISS कार्यक्रम में तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने पाकिस्तान के साथ अपने देश के संबंधों का बचाव करते हुए कहा कि भारत को इससे असहज नहीं होना चाहिए। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद आई कड़वाहट के बीच भारत के साथ कोई ऐतिहासिक शत्रुता न होने का हवाला देकर बेहतर रिश्तों की इच्छा जताई।
New Delhi : भारत और तुर्की के रिश्तों में आई कड़वाहट के बीच तुर्की ने एक बार फिर पाकिस्तान के साथ अपनी करीबी को लेकर खुलकर बयान दिया है। तुर्की के विदेश मंत्री के हालिया बयान ने न केवल दोनों देशों के संबंधों को चर्चा में ला दिया है, बल्कि उसकी विदेश नीति को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
पाकिस्तान से दोस्ती पर कायम तुर्की
सिंगापुर में आयोजित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (IISS) के कार्यक्रम के दौरान तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने पाकिस्तान के साथ अपने देश के संबंधों का बचाव किया। उन्होंने कहा कि भारत को तुर्की और पाकिस्तान की मित्रता को लेकर असहज नहीं होना चाहिए।
उनका कहना था कि दुनिया के कई देशों के आपसी रिश्ते अलग-अलग मुद्दों पर आधारित होते हैं और लड़ाई होने के बावजूद सकारात्मक सहयोग जारी रखा जा सकता है। तुर्की भी इसी सिद्धांत पर आगे बढ़ना चाहता है।
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कई देशों से हैं अलग-अलग समीकरण
तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध रखने वाला उनका देश अकेला नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि तुर्की के रूस, अमेरिका और कई यूरोपीय देशों के साथ भी कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं, लेकिन इसके बावजूद संवाद और सहयोग जारी रहता है।
भारत से बेहतर रिश्तों की जताई इच्छा
अपने संबोधन में फिदान ने भारत के साथ मजबूत और सकारात्मक संबंधों की इच्छा भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच न तो कोई सीमा विवाद है और न ही कोई ऐतिहासिक शत्रुता। ऐसे में बेहतर सहयोग और साझेदारी के लिए पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी थी दूरी
हालांकि तुर्की के इस बयान के पीछे पिछले वर्ष की घटनाओं की छाया साफ दिखाई देती है। भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में चलाए गए Operation Sindoor के दौरान तुर्की ने पाकिस्तान के पक्ष में रुख अपनाया था। तुर्की ने भारतीय कार्रवाई की आलोचना की थी, जिससे नई दिल्ली में नाराजगी बढ़ गई थी।
बयान से उठे नए सवाल
एक ओर तुर्की भारत के साथ रिश्ते सुधारने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के प्रति अपनी खुली समर्थन भावना भी दोहरा रहा है। ऐसे में इंटरनेशनल मामलों के जानकार इसे तुर्की की संतुलन साधने की कोशिश मान रहे हैं। अब देखना होगा कि आने वाले समय में भारत इस बयान को किस नजरिए से देखता है और दोनों देशों के संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।