स्वास्थ्य विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा: भतीजे की डिग्री पर तीन जिलों में सरकारी नौकरी करता रहा फर्जी डॉक्टर, लोकायुक्त जांच में बड़ा खुलासा

मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। लोकायुक्त की कार्रवाई के दौरान रिश्वत लेते हुए पकड़े गए एक मेडिकल ऑफिसर की जांच में कथित तौर पर फर्जी पहचान का मामला सामने आया। आरोप है कि आरोपी ने अपने भतीजे के शैक्षणिक दस्तावेज और मेडिकल डिग्री का इस्तेमाल कर सरकारी

Jul 17, 2026 - 11:30
स्वास्थ्य विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा: भतीजे की डिग्री पर तीन जिलों में सरकारी नौकरी करता रहा फर्जी डॉक्टर, लोकायुक्त जांच में बड़ा खुलासा

मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। लोकायुक्त की कार्रवाई के दौरान रिश्वत लेते हुए पकड़े गए एक मेडिकल ऑफिसर की जांच में कथित तौर पर फर्जी पहचान का मामला सामने आया। आरोप है कि आरोपी ने अपने भतीजे के शैक्षणिक दस्तावेज और मेडिकल डिग्री का इस्तेमाल कर सरकारी सेवा हासिल की। इतना ही नहीं, वह अलग-अलग जिलों में मेडिकल ऑफिसर के रूप में पदस्थ रहकर सरकारी वेतन भी लेता रहा। इस खुलासे के बाद पूरे मामले की जांच कई स्तरों पर शुरू कर दी गई है।

इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की भर्ती प्रक्रिया, दस्तावेजों के सत्यापन और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस और लोकायुक्त दोनों अपने-अपने स्तर पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही सभी तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

भतीजे ने सोशल मीडिया पर तस्वीर देखी

मामले का खुलासा उस समय हुआ जब राजस्थान के डूंगरपुर जिले में मेडिकल ऑफिसर के पद पर कार्यरत डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने सोशल मीडिया पर लोकायुक्त कार्रवाई से जुड़ी खबर और आरोपी की तस्वीर देखी।

उन्होंने दावा किया कि तस्वीर में दिखाई देने वाला व्यक्ति उनके चाचा सतीश शर्मा हैं। इसके बाद उन्होंने मध्यप्रदेश के जयसिंहनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई और आरोप लगाया कि उनकी मेडिकल डिग्री, शैक्षणिक दस्तावेज और पहचान का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर सरकारी नौकरी हासिल की गई।

शिकायत में डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने कहा

शिकायत में डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने कहा कि वे वर्षों से राजस्थान में नियमित रूप से सरकारी सेवा दे रहे हैं और उन्होंने कभी मध्यप्रदेश में नौकरी नहीं की। ऐसे में उनके नाम और दस्तावेजों का उपयोग कैसे हुआ, यह जांच का सबसे बड़ा विषय बन गया है।

अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ, भर्ती प्रक्रिया में किन अधिकारियों की भूमिका रही और क्या यह फर्जीवाड़ा किसी संगठित नेटवर्क की मदद से किया गया।

तीन जिलों में नौकरी और वेतन का दावा

लोकायुक्त जांच में सामने आई शुरुआती जानकारी के अनुसार आरोपी की पदस्थापना शहडोल, खरगोन और श्योपुर जैसे तीन अलग-अलग जिलों से जुड़ी बताई जा रही है। यदि जांच में यह दावा सही साबित होता है, तो यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि एक व्यक्ति का रिकॉर्ड एक साथ कई जिलों में कैसे दर्ज रहा और सरकारी वेतन का भुगतान किस प्रक्रिया के तहत होता रहा। यही वजह है कि अब जांच का दायरा केवल फर्जी पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि वेतन भुगतान, सेवा रिकॉर्ड, नियुक्ति आदेश और विभागीय निगरानी व्यवस्था की भी जांच की जा रही है।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी सेवाओं में नियुक्ति के दौरान दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन, आधार आधारित पहचान और नियमित ऑडिट बेहद जरूरी है। यदि समय-समय पर रिकॉर्ड की जांच की जाती, तो ऐसे मामलों का पहले ही पता चल सकता था।

फिलहाल पुलिस शिकायत के आधार पर जांच कर रही है, जबकि लोकायुक्त रिश्वत मामले और कथित फर्जी नियुक्ति दोनों पहलुओं की अलग-अलग जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे मामले में किन अधिकारियों या कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होती है और सरकारी खजाने को कितना नुकसान हुआ।

 

Anand Sahay पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और ब्रेकिंग न्यूज़ तथा राष्ट्रीय खबरों को कवर करने में विशेष रुचि रखते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं का विश्लेषण कर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।