डबरा में अवैध रेत परिवहन ने ली एक और जान, ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से चालक की मौत, हादसे ने खड़े किए गंभीर सवाल
ग्वालियर चंबल संभाग, जो अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के लिए कुख्यात है, में एक बार फिर कमजोर इच्छाशक्ति और शायद भ्रष्टाचार की मलाई के चलते एक बेकसूर की जान चली गई। सरकार की लाख कोशिशों और दावों के बावजूद रेत माफिया का कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है, और किसी को किसी की जान
ग्वालियर चंबल संभाग, जो अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के लिए कुख्यात है, में एक बार फिर कमजोर इच्छाशक्ति और शायद भ्रष्टाचार की मलाई के चलते एक बेकसूर की जान चली गई। सरकार की लाख कोशिशों और दावों के बावजूद रेत माफिया का कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है, और किसी को किसी की जान की परवाह नहीं है। इसी जानलेवा सिलसिले में डबरा क्षेत्र में अवैध और ओवरलोड रेत परिवहन ने एक और घर का चिराग बुझा दिया, जब रेत से भरी एक ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई, जिससे उसके चालक की मौके पर ही दबकर दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना एक बार फिर क्षेत्र में व्याप्त अवैध रेत कारोबार और उस पर लगाम कसने में प्रशासन की विफलता की पोल खोलती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान संदीप गुर्जर (26 वर्ष) पुत्र बृजमोहन गुर्जर के रूप में हुई है, जो भिंड जिले के ग्राम खड़ुआँ का निवासी था। यह दुर्भाग्यपूर्ण हादसा शुक्रवार सुबह लगभग 4 बजे तब हुआ, जब ट्रैक्टर-ट्रॉली सिंध नदी से रेत भरकर आ रही थी। ग्राम छपरा के पास अचानक वाहन अनियंत्रित हो गया और पलट गया। पलटने के बाद, चालक संदीप ट्रॉली के नीचे बुरी तरह से दब गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हृदय विदारक घटना ने परिवार में मातम पसरा दिया है और क्षेत्र के लोगों में भारी आक्रोश है।
शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा
हादसे की सूचना मिलते ही पिछोर थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया, ताकि मौत के सही कारणों का पता चल सके। पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह के हादसों की जड़ें प्रशासनिक लापरवाही और रेत माफिया के बेखौफ संचालन में गहरी हैं।
ओवरलोड रेत वाहनों का संचालन लगातार जारी
क्षेत्रीय निवासियों के अनुसार, डबरा और आसपास के इलाकों में ओवरलोड रेत वाहनों का संचालन लगातार जारी है। दिन हो या रात, ये वाहन सड़कों पर मौत बनकर दौड़ते हैं, लेकिन संबंधित विभागों द्वारा इन पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है और रेत माफिया अपनी मनमानी कर रहा है। स्थानीय लोगों का स्पष्ट मानना है कि यदि समय रहते इन ओवरलोड वाहनों पर सख्ती बरती जाती और अवैध परिवहन को रोका जाता, तो शायद संदीप गुर्जर जैसे कई बेकसूरों की जान बचाई जा सकती थी। यह कोई पहली घटना नहीं है, जब अवैध रेत परिवहन ने किसी की जान ली हो; ऐसे कई हादसे पहले भी हो चुके हैं, जो बार-बार प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठाते रहे हैं।
रेत परिवहन हादसों ने खड़े किए गंभीर सवाल
क्षेत्र में बढ़ते रेत परिवहन हादसों ने एक बार फिर प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह स्पष्ट है कि सिर्फ खानापूर्ति की कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस और निरंतर अभियान चलाने की आवश्यकता है, जिससे रेत माफिया की कमर तोड़ी जा सके और आम जनता की जान सुरक्षित रह सके। जब तक प्रशासन अपनी इच्छाशक्ति मजबूत नहीं करेगा और भ्रष्टाचार की मलाई को दरकिनार कर ईमानदारी से काम नहीं करेगा, तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे और बेकसूर लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे।