नर्मदा में गंदा पानी गिरने पर NHRC का एक्शन, प्रियंक कानूनगो ने प्रशासन को लगाई फटकार
नर्मदापुरम में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने जिला प्रशासन और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। समीक्षा बैठक और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने नर्मदा नदी में बिना शोधन के गंदा पानी छोड़े जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने इसे केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य का
नर्मदापुरम में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने जिला प्रशासन और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। समीक्षा बैठक और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने नर्मदा नदी में बिना शोधन के गंदा पानी छोड़े जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने इसे केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य का भी बड़ा मुद्दा बताया। कानूनगो ने कहा कि जब सरकारें नदियों की सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं, तब भी यदि गंदा पानी सीधे नदी में पहुंच रहा है तो यह जिम्मेदार अधिकारियों की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
नर्मदा नदी मध्य प्रदेश की जीवनरेखा मानी जाती है और लाखों लोगों की आस्था इससे जुड़ी हुई है। ऐसे में नदी में लगातार प्रदूषित पानी का पहुंचना चिंता का विषय बनता जा रहा है। NHRC सदस्य ने स्पष्ट कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर आने वाले वर्षों में पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। उन्होंने अधिकारियों को जवाबदेही तय करने और सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
नर्मदा प्रदूषण पर NHRC की सख्ती
प्रियंक कानूनगो ने समीक्षा के दौरान पाया कि शहर के कुछ हिस्सों से निकलने वाला गंदा पानी बिना पूरी तरह साफ किए नर्मदा नदी में पहुंच रहा है। उन्होंने इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया और कहा कि दूषित पानी नदी के पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वच्छ नदी अभियान के तहत केंद्र और राज्य सरकारें लगातार निवेश कर रही हैं। इसके बावजूद यदि सीवर का पानी सीधे नदी में जा रहा है, तो संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली की समीक्षा जरूरी है। कानूनगो ने नर्मदा घाट क्षेत्र में बनाई जा रही पाइपलाइन और एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) पंपिंग स्टेशन की डिजाइन पर भी सवाल उठाए।
उनका कहना था कि केवल परियोजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि उनका संचालन प्रभावी तरीके से हो। उन्होंने जिला प्रशासन को तकनीकी जांच कर पूरी व्यवस्था का मूल्यांकन करने और जरूरत पड़ने पर सुधारात्मक योजना तैयार करने के निर्देश दिए। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि सीवेज ट्रीटमेंट व्यवस्था मजबूत नहीं होगी तो नदी प्रदूषण को नियंत्रित करना मुश्किल होगा।
सफाईकर्मियों के वेतन और सामाजिक मुद्दों पर भी दिए अहम निर्देश
नर्मदा प्रदूषण के अलावा NHRC सदस्य ने नगर पालिका में कार्यरत आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों से जुड़ी शिकायतों पर भी गंभीर रुख अपनाया। समीक्षा के दौरान जानकारी मिली कि कई कर्मचारियों को निर्धारित कलेक्टर दर के अनुसार वेतन नहीं मिल रहा है। इस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को सभी कर्मचारियों के बैंक खातों में समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही श्रम विभाग को वेतन भुगतान रिकॉर्ड और कर्मचारियों के रोस्टर की जांच करने को कहा गया। यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।
कानूनगो ने सामाजिक समानता से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान दिया। उन्होंने बताया कि शहर में एक घाट और एक मोहल्ले का नाम जातिसूचक पाया गया है, जो संविधान की भावना और समानता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने प्रशासन को ऐसे नामों के बदलाव की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा राम-जानकी मंदिर के पास संचालित एक कथित अवैध मांस-मटन दुकान के मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को भी कहा गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नर्मदा नदी को जीवित इकाई का दर्जा प्राप्त है, इसलिए उसके आसपास किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि नहीं होनी चाहिए जो नदी की पवित्रता और पर्यावरण को प्रभावित करे।
नर्मदापुरम दौरे के दौरान NHRC सदस्य की टिप्पणियों ने प्रशासनिक व्यवस्था, नदी संरक्षण और श्रमिक अधिकारों जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इन निर्देशों पर कितनी तेजी और गंभीरता से अमल करता है।